आशा है नव साल की, सुखद बने पहचान
खिली-खिली हो ज़िंदगी, महक उठें अरमान।आशा है नव साल की, सुखद बने पहचान॥ दर्द-दुखों का अंत हो, विपदाएँ हों दूर।कोई
Read Moreखिली-खिली हो ज़िंदगी, महक उठें अरमान।आशा है नव साल की, सुखद बने पहचान॥ दर्द-दुखों का अंत हो, विपदाएँ हों दूर।कोई
Read Moreनव वर्ष आते ही हमारे समाज में एक अजीब-सी हलचल शुरू हो जाती है। कैलेंडर बदलता है, मोबाइल पर शुभकामनाओं
Read Moreपल-पल खेल निराले हो,आँखों में सपने पाले हो।नए साल का सूर्योदय यह,खुशियों के लिए उजाले हो॥ मानवता का संदेश फैलाते,मस्जिद
Read Moreभारत में विवाह केवल दो व्यक्तियों का निजी संबंध नहीं होता, बल्कि वह समाज की सामूहिक चेतना, नैतिकता और सत्ता-संरचना
Read Moreभारत में बाल तस्करी आज केवल एक सामाजिक विकृति नहीं, बल्कि एक सुव्यवस्थित, बहुस्तरीय और संगठित आपराधिक तंत्र का रूप
Read Moreभारत में लड़कियों की स्कूली शिक्षा की कहानी आज़ादी के बाद के विकास‑वृत्तांत की सबसे जटिल और मार्मिक कड़ी है।
Read Moreमिट्टी की उन पगडंडियों पर, जहाँ सुबह‑सुबह धूप भी संकोच से उतरती है, एक छोटी‑सी लड़की आज फिर घर की
Read Moreछोटी‑सी वो लड़की है,मन में स्कूल बसाए,लेकिन घर के कामों ने,उसके पंख कतराए। सुबह‑सुबह वो बैग उठाकरदहलीज़ पे रुक जाती
Read Moreमैंने वर्तमान की देहरी परअपने थके सपने रख दिए,पल ने चुपचापमेरी आँखों से बात की।भविष्य दूरधुँध में लिपटा खड़ा रहा,उसके
Read Moreरिया को बचपन से ही छायाचित्र लेने का शौक था। जब उसके हमउम्र बच्चे खिलौनों, खेलों और अपने छोटे-छोटे झगड़ों
Read More