जी राम जी: ग्रामीण भारत में विश्वास और उम्मीद
भारत की राजनीति में विश्वास केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जन-धारणाओं और नीतिगत परिणामों का प्रतिफल है। ‘विकसित भारत–जी राम
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Read Moreहाल ही में 10 वर्षीय एक बच्चे की अचानक मृत्यु से जुड़ा समाचार केवल एक दुखद घटना नहीं है, बल्कि
Read Moreपर्यावरण संरक्षण की बहस अक्सर एक सुविधाजनक दिशा में मोड़ दी जाती है—सरकारें नीतियाँ नहीं बनातीं, मंत्रालय निष्क्रिय हैं, क़ानून
Read Moreआज जिस दुनिया में हर उपलब्धि को फ़्लैश लाइट, कैमरा और सोशल मीडिया की चमक से मापा जाता है, वहाँ
Read Moreमुझे पुरुष चाहिए—कभी शरण की छाया बनकर,कभी वंश की दीपशिखा बनकर,कभी जीवन-पथ का सहयात्री बनकर।और जब अँधेरा घिर आए,तो वही
Read Moreलोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रशासनिक सीमाएँ पत्थर की लकीर नहीं होतीं। वे जनता की सुविधा, सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं और क्षेत्रीय संतुलन के
Read Moreइतिहास कभी अचानक नहीं बदलता, वह धीरे-धीरे करवट लेता है। हरियाणा की प्राचीन नगरी हांसी इसका जीवंत उदाहरण है। एक
Read Moreभारतीय संसद लोकतंत्र की आत्मा मानी जाती है। यही वह मंच है जहाँ जनता की विविध आकांक्षाएँ, असहमतियाँ और अपेक्षाएँ
Read Moreडिजिटल युग में बच्चों और किशोरों का जीवन केवल भौतिक संसार तक सीमित नहीं रह गया है। सामाजिक माध्यम, ऑनलाइन
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