Author: *डॉ. प्रियंका सौरभ

सामाजिक

‘वाइफ स्वैपिंग’ और हमारे रिश्तों की टूटती नींव: समाज का आईना 

कुछ विषय ऐसे होते हैं जिन पर लिखना आसान नहीं होता। वे केवल शब्दों की नहीं, बल्कि सामाजिक, मानसिक और

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राजनीति

वर्दी, मर्यादा और विश्वास का संकट

लोकतंत्र में सत्ता का सबसे संवेदनशील और प्रभावशाली चेहरा पुलिस व्यवस्था होती है। पुलिस केवल कानून लागू करने वाली संस्था

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समाचार

‘आखर थोरे’ में डॉ. प्रियंका ‘सौरभ’ की पाँच लघुकथाएँ शामिल

हिसार की प्रख्यात दैनिक संपादकीय लेखिका एवं राजनीति विज्ञान में डॉक्टरेट डॉ. प्रियंका ‘सौरभ’ को हिंदी लघुकथा के प्रतिष्ठित संग्रह

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सामाजिक

रिश्तों में संतुलन का संकट : भावनाओं के शोषण की सामाजिक सच्चाई

मनुष्य का जीवन रिश्तों के ताने-बाने से ही आकार लेता है। परिवार, मित्रता, प्रेम, सहयोग और सामाजिक संबंध—ये सभी हमारे

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सामाजिक

माँ-बाप की नीयत, परवरिश और टूटते घर 

भारतीय समाज में माता-पिता को सर्वोच्च नैतिक स्थान प्राप्त है। उन्हें त्याग, तपस्या और निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक माना जाता

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धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ऋतु परिवर्तन का लोकउत्सव: लोहड़ी और नई ऋतु की दस्तक

भारत की लोकपरंपराएँ केवल पर्व-त्योहार नहीं होतीं, वे समाज की सामूहिक स्मृति, प्रकृति-बोध और जीवन-दर्शन की जीवित अभिव्यक्तियाँ होती हैं।

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