ममता की छाँव
लाल दुपट्टा, मीठी मुस्कान,माँ जैसी लगती पूरी जहान।गोदी में नन्हा सपना प्यारा,आँखों में चमके चाँद सितारा। मेले की रंग-बिरंगी राहें,खुशियों
Read Moreलाल दुपट्टा, मीठी मुस्कान,माँ जैसी लगती पूरी जहान।गोदी में नन्हा सपना प्यारा,आँखों में चमके चाँद सितारा। मेले की रंग-बिरंगी राहें,खुशियों
Read Moreतप्त धूप अब कह रही, सुनो धरा की पीर।सूखे वन-उपवन हुए, रोए झरने-नीर।। सूरज अग्नि उगल रहा, झुलसे सब इंसान।छाँव
Read Moreहरियाणा की धरती को लंबे समय तक पारिवारिक प्रेम, भाईचारे और संयुक्त परिवारों की संस्कृति के लिए जाना जाता रहा
Read Moreपेट्रोलों के बढ़ गए, देखो फिर अब भाव।महँगाई की मार से, डगमग सबकी नाव।। ट्रैक्टर, बस, ट्रक सभी, माँग रहे
Read Moreपिछले कुछ समय से देश के शहरों और गांवों में एक चिंता लगातार सुनाई दे रही है—पेट्रोल और डीज़ल की
Read Moreरील-शोहरत का लगा, अब तो ऐसा रोग।लाज-शरम सब बेचते, वाह-वाह के लोग।। लाइक-शेयर की भूख में, बेच रहे संस्कार,प्रसिद्धि की
Read Moreदिल्ली केवल भारत की राजधानी नहीं, बल्कि सत्ता की वह पुरानी चौसर है जहाँ मोहरे बदलते रहते हैं, पर खेल
Read Moreगर्मी आई गाँव में, तपने लगा जहान।मटके वाला जल बना, जैसे अमृत-दान।। सूरज बरसे आग-सा, झुलसे खेत-खलिहान,प्यासे पंछी ढूँढते, छाँव
Read Moreकॉकरोच को तुच्छ कह, भरते मन अभिमान।भीतर बैठे भेड़िए, ऊपर मीठी तान।। लोमड़ जैसी चाल से, करते रोज़ शिकार,गिरगिट जैसे
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