कन्यादान नहीं, सम्मान चाहिए
आज विश्व बालिका दिवस मनाया जा रहा है। देश और दुनिया में इस अवसर पर अनेक कार्यक्रम, संगोष्ठियाँ और प्रतीकात्मक
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Read Moreकुछ विषय ऐसे होते हैं जिन पर लिखना आसान नहीं होता। वे केवल शब्दों की नहीं, बल्कि सामाजिक, मानसिक और
Read Moreलोकतंत्र में सत्ता का सबसे संवेदनशील और प्रभावशाली चेहरा पुलिस व्यवस्था होती है। पुलिस केवल कानून लागू करने वाली संस्था
Read Moreकिसी भी राष्ट्र की मजबूती उसके सैन्य बजट, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दिए गए भाषणों या विदेशी नेताओं के साथ खिंचवाई
Read Moreहिसार की प्रख्यात दैनिक संपादकीय लेखिका एवं राजनीति विज्ञान में डॉक्टरेट डॉ. प्रियंका ‘सौरभ’ को हिंदी लघुकथा के प्रतिष्ठित संग्रह
Read Moreमनुष्य का जीवन रिश्तों के ताने-बाने से ही आकार लेता है। परिवार, मित्रता, प्रेम, सहयोग और सामाजिक संबंध—ये सभी हमारे
Read Moreशिक्षा के काग़ज़ी जहाज़सत्ता की नहर में डुबोए जा रहे हैं,कक्षाओं पर ताले जड़ दिए गए हैंऔर मैदानों में नारे
Read Moreशिक्षा को भारतीय समाज में ‘मंदिर’ कहा जाता रहा है—एक ऐसा पवित्र स्थान जहाँ ज्ञान, संस्कार और भविष्य का निर्माण
Read Moreभारतीय समाज में माता-पिता को सर्वोच्च नैतिक स्थान प्राप्त है। उन्हें त्याग, तपस्या और निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक माना जाता
Read Moreभारत की लोकपरंपराएँ केवल पर्व-त्योहार नहीं होतीं, वे समाज की सामूहिक स्मृति, प्रकृति-बोध और जीवन-दर्शन की जीवित अभिव्यक्तियाँ होती हैं।
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