माँ-बाप की नीयत, परवरिश और टूटते घर
भारतीय समाज में माता-पिता को सर्वोच्च नैतिक स्थान प्राप्त है। उन्हें त्याग, तपस्या और निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक माना जाता
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Read Moreभारत की लोकपरंपराएँ केवल पर्व-त्योहार नहीं होतीं, वे समाज की सामूहिक स्मृति, प्रकृति-बोध और जीवन-दर्शन की जीवित अभिव्यक्तियाँ होती हैं।
Read Moreआन-बान सब शान है, और हमारा गर्व।हिंदी से ही पर्व है, हिंदी सौरभ सर्व।। हिंदी हृदय गान है, मृदु गुणों
Read Moreविश्व पटल पर आपसे, बढ़ा देश का मान।युवा विवेकानंद हैं, भारत का अभिमान॥ युवा विवेकानंद ने, दी अद्भुत पहचान।युवा शक्ति
Read Moreगुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम के दौरान हिन्दी के वरिष्ठ कथाकार मनोज रूपड़ा के साथ
Read Moreअख़बार की एक छोटी-सी खबर कई बार पूरे समाज के चेहरे से नक़ाब हटा देती है। “पढ़ाई के लिए कहने
Read Moreसड़क दुर्घटना मुआवज़े की तकनीकी व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय संविधान के मूल दर्शन—समता, गरिमा और कल्याणकारी
Read Moreबुरा वक़्त अकेला नहीं आता,वह अपने साथ बहुत कुछ समेट ले जाता है।छीनता है रिश्तों का शोर,सहारे का भ्रम,और जाते-जातेएक
Read Moreभारत को सदियों से धर्म, आस्था और आध्यात्म की भूमि माना जाता रहा है। यहाँ धर्म केवल पूजा-पाठ या कर्मकांड
Read Moreआँगन सूने हैं,दीवारें गिनती हैंउन पगचिह्नों कोजो कभी पड़े ही नहीं। जिन बेटियों कोजन्म से पहलेहमने चुपचाप विदा कर दिया,आज
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