गूंगे सिखा रहे हैं हमें, कितना बोलना चाहिए
खामोशी में बैठे, सब नियम बताते हैं,सच छुपाने को ही धर्म बतलाते हैं।जो अपनी आवाज़ खो चुके, वही हुक्म लगाते
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Read Moreहरियाणा में गुमशुदगी के बढ़ते मामले अब केवल पुलिस रजिस्टरों या अख़बारों की सुर्खियों तक सीमित नहीं रहे हैं। ये
Read Moreआज के दौर में स्वास्थ्य को लेकर हमारी सोच तेजी से बदली है। आधुनिक जीवनशैली, तकनीक, महंगी चिकित्सा सुविधाएँ और
Read Moreहरियाणा पुलिस की एक महिला इंस्पेक्टर का निलंबन महज़ एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह उस सड़ांध की ओर
Read Moreआज भारतीय संसद की कार्यवाही ने लोकतंत्र की उस बुनियादी शर्त पर गहरे प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं, जिसे हम
Read Moreहरियाणा के सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय मेले में झूला टूटने की घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हमारे यहाँ
Read Moreआज देश की हॉस्पिटल व्यवस्था जिस हालत में पहुँच चुकी है, वह किसी एक व्यक्ति की पीड़ा नहीं, बल्कि करोड़ों
Read Moreभारत का लोकतंत्र केवल एक शासन प्रणाली नहीं, बल्कि एक नैतिक संकल्प है—समानता, न्याय और बंधुत्व का। संविधान की प्रस्तावना
Read Moreसंवैधानिक संशोधन लोकतंत्र की आत्मा होते हैं, जो समय के साथ बदलती चुनौतियों का सामना करने के लिए ढांचे को
Read Moreसुप्रीम कोर्ट द्वारा स्कूलों में छात्राओं को निःशुल्क सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने और मासिक धर्म स्वच्छता को अनिवार्य करने संबंधी
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