पर्यावरण संकट : नीतियों से नहीं, नागरिक चेतना से बचेगी प्रकृति
पर्यावरण संरक्षण की बहस अक्सर एक सुविधाजनक दिशा में मोड़ दी जाती है—सरकारें नीतियाँ नहीं बनातीं, मंत्रालय निष्क्रिय हैं, क़ानून
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Read Moreआज जिस दुनिया में हर उपलब्धि को फ़्लैश लाइट, कैमरा और सोशल मीडिया की चमक से मापा जाता है, वहाँ
Read Moreमुझे पुरुष चाहिए—कभी शरण की छाया बनकर,कभी वंश की दीपशिखा बनकर,कभी जीवन-पथ का सहयात्री बनकर।और जब अँधेरा घिर आए,तो वही
Read Moreलोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रशासनिक सीमाएँ पत्थर की लकीर नहीं होतीं। वे जनता की सुविधा, सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं और क्षेत्रीय संतुलन के
Read Moreइतिहास कभी अचानक नहीं बदलता, वह धीरे-धीरे करवट लेता है। हरियाणा की प्राचीन नगरी हांसी इसका जीवंत उदाहरण है। एक
Read Moreभारतीय संसद लोकतंत्र की आत्मा मानी जाती है। यही वह मंच है जहाँ जनता की विविध आकांक्षाएँ, असहमतियाँ और अपेक्षाएँ
Read Moreडिजिटल युग में बच्चों और किशोरों का जीवन केवल भौतिक संसार तक सीमित नहीं रह गया है। सामाजिक माध्यम, ऑनलाइन
Read Moreवह साइकिल नहीं चलाता था,वह समय को थामे चलता था।थैले में सिर्फ़ ख़त नहीं होते थे,किसी माँ की प्रतीक्षा,किसी बेटे
Read Moreरूस के साथ भारत के संबंध दशकों से सामरिक साझेदारी, रक्षा सहयोग और राजनीतिक विश्वास की मजबूत नींव पर टिका
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