जबलपुर की लहर में
जबलपुर की लहर में, भरी समंदर पीर,ममता का वह रूप था, ईश्वर की तस्वीर॥ क्रुज की उस चीख में, गूँजी
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Read Moreआज के समय में पीएचडी (Doctor of Philosophy) को लेकर समाज में अनेक धारणाएँ प्रचलित हैं। कुछ लोग इसे केवल
Read Moreयोगी भोगी हो गए, संत चले बाजार।अबलाएँ मठ-लोक से, रह-रह करें पुकार॥ माटी की मर्याद भी, हुई आज बेहाल,धर्म-ध्वजा के
Read Moreअपने प्यारे गाँव से, बस है यही सवाल।बूढ़ा पीपल है कहाँ, गई कहाँ चौपाल॥ माटी की सोंधी महक, अब लगती
Read Moreभारत में उच्च शिक्षा का तीव्र विस्तार अवसरों के साथ-साथ गंभीर चुनौतियाँ भी लेकर आया है। एक ओर विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों
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Read Moreमूक हुई किलकारियाँ, गुम बच्चों की रेल।गूगल में अब खो गये, बचपन के सब खेल॥ आँगन सूना हो गया, चुप
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Read Moreलोकतंत्र अब रो रहा, देख बुरे हालात।संसद में चलने लगे, थप्पड़-घूँसे, लात॥ मर्यादा के नाम पर, होती केवल बात।शब्दों में
Read Moreसमाज की प्रगति केवल इमारतों, तकनीक और आर्थिक विकास से नहीं मापी जाती, बल्कि इस बात से भी तय होती
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