Author: *डॉ. प्रियंका सौरभ

सामाजिक

ऑफिस टाइम के बाद नो कॉल–नो ईमेल : बॉस का फोन न उठाने का हक

भारत का कार्य-संस्कृति परिदृश्य पिछले दो दशकों में जिस तेज़ी से बदला है, शायद ही दुनिया का कोई अन्य देश

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राजनीति

अंतरराष्ट्रीय मंच पर शिष्टाचार और भारतीय प्रतिनिधित्व का सवाल

भारत में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के इंटरव्यू को लेकर उठी बहस किसी छोटे विवाद का परिणाम नहीं है, बल्कि

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राजनीति

मसूरी में 600 प्रशिक्षु आईएएस और एक सवाल

उत्तराखंड के शांत, अनुशासित और सुसंस्कृत वातावरण में स्थित मसूरी का प्रसिद्ध प्रशासनिक अकादमी परिसर—लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी—देश

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राजनीति

बदलती विश्व-व्यवस्था और जी-20 की चुनौती

विश्व-राजनीति वर्तमान समय में गहरे परिवर्तनों से गुजर रही है। महाशक्तियों के बीच अविश्वास, क्षेत्रीय युद्ध, आर्थिक संकट, तकनीकी वर्चस्व

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शिक्षा एवं व्यवसाय

आईएएस अधिकारी के बच्चे आईएएस नहीं बनना चाहते? 

भारत में प्रशासनिक सेवा को लंबे समय से शक्ति, प्रतिष्ठा और राष्ट्र-निर्माण के सर्वोच्च प्रतीकों में गिना जाता रहा है।

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इतिहास

गाँव पेटवाड़ का लाल : जस्टिस सूर्यकांत की यात्रा देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश तक

मेरे पति डॉ. सत्यवान सौरभ के साहित्यिक गुरु पंडित मदन गोपाल जी अब इस भौतिक संसार में नहीं हैं, लेकिन

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सामाजिक

जब कानून और समाज आमने–सामने खड़े हों

भारत जैसे विशाल और विविध सामाजिक ढाँचे वाले राष्ट्र में व्यक्ति के अधिकार और समाज की सामूहिक मर्यादाएँ एक-दूसरे से

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