फूहड़ शब्दों का ग्लैमर और वर्चुअल समाज की विडंबना
कुछ समय पहले तक मुझे यह गलतफहमी थी कि सोशल मीडिया पर केवल रील्स और वीडियोज़ में वल्गर या बेहूदा
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Read Moreसड़क, तुम अब आई हो गाँव,जब सारा गाँव शहर जा चुका है।जिन गलियों में बचपन की चीखें गूँजती थीं,अब वहाँ
Read Moreभारतीय समाज की संरचना में जाति एक ऐसी संस्था रही है जिसने व्यक्ति के जन्म से लेकर मृत्यु तक उसके
Read Moreभारत पर्वों की भूमि है, जहाँ हर उत्सव केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और मानवीय भावनाओं
Read Moreभारत जैसे विविध और बहुधार्मिक देश में जब कोई राज्य व्यक्तिगत जीवन से जुड़े विषयों पर नीति बनाता है, तो
Read Moreहमारे समाज में बच्चों का बचपन उनकी सबसे बड़ी संपत्ति है। उनका खेलना, पढ़ना, सीखना और सुरक्षित वातावरण में पनपना
Read Moreभारतीय शहरों में वायु प्रदूषण आज केवल पर्यावरण की समस्या नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और सामाजिक स्थिरता से जुड़ा गहन
Read Moreमित्र वही जो साथ निभाए, दुःख-सुख में मुस्काए,हर जख्म पर मरहम रखे, आँसू भी मुस्कराए।जो दिल से दिल तक बाँध
Read Moreजब मैंने ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में दस वर्षीय बालक इशित का वह दृश्य देखा जिसमें उसने अमिताभ बच्चन से कहा
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