आतंक पर निर्णायक सख़्ती ज़रूरी
भारत एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहाँ आतंकवाद का स्वरूप बदलकर और भी जटिल और खतरनाक हो चुका
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Read Moreभारत आज उभरती वैशिक अर्थव्यवस्था का महत्त्वपूर्ण केंद्र बन रहा है और इसी आकांक्षा के साथ वह अपनी मुद्रा—भारतीय रुपये—को
Read Moreहर युग में कुछ आवाज़ें होती हैं जो भाषण नहीं देतीं, आंदोलन नहीं चलातीं, बस चुपचाप लिखती हैं — और
Read Moreसमाज परिवर्तन की सबसे कठिन, सबसे लंबी और सबसे महत्त्वपूर्ण यात्रा हमेशा अपने मूल में उन छोटे-छोटे बीजों से शुरू
Read Moreसच बेच दिया—मोल लगा कर,कलम टाँग दी दीवारों पर।अख़बारों की जेबें भारी,जनता लुटी बाज़ारों पर। “स्वतंत्र” शब्द अब खोखला-सा,सत्ता की
Read Moreभारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहाँ शासन की असली शक्ति जनता के हाथों में निहित मानी जाती है।
Read Moreहर वर्ष 14 नवम्बर को भारत में बाल दिवस बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह दिन स्वतंत्र भारत
Read Moreरविवार की सुबह थी। मन हुआ कि बेटा प्रज्ञान गोद में आए और हम दोनों मिलकर अख़बार में से कोई
Read Moreअकेले हो जाने के खौफ से,तुम खुद से जुदा मत हो जाना।ये भीड़ बहुत शोर करती है,मगर दिल का सन्नाटा
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