हरियाणा दिवस – गौरव की धरती
हरियाणा की मिट्टी सोंधी, सुगंध बिखेरै चारों ओर,हल चलावै किसान हंसकै, खेतां मं लहरै लोर। जहाँ गीता का उपदेश मिल्यो,
Read Moreहरियाणा की मिट्टी सोंधी, सुगंध बिखेरै चारों ओर,हल चलावै किसान हंसकै, खेतां मं लहरै लोर। जहाँ गीता का उपदेश मिल्यो,
Read Moreकभी कोई व्हाट्सएप पर लिखता है, कभी मैसेंजर पर, तो कभी ईमेल में — “हमने समाज सेवा के लिए एक
Read Moreकिसने कहा —नारी बस आँचल की सीमाओं में बंधी है,वह तो तूफ़ान की श्वास है,जो चट्टानों में भी पथ बनाती
Read Moreआज का दिन भारतीय खेल इतिहास में स्वर्णाक्षरों से लिखा जाएगा। महिला क्रिकेट विश्वकप 2025 के सेमीफाइनल में भारत ने
Read Moreजब तक चाँद आसमान में था,वह सपना था —हर रात के सन्नाटे मेंआशा की एक उजली बूँद-सा टपकता था। उसकी
Read Moreदेश की शिक्षा व्यवस्था एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहाँ सबसे बुनियादी स्तंभ — शिक्षक — स्वयं डगमगाने
Read Moreशाम उतर आई थी,आँगन की मिट्टी ठंडी हो चली थी,और दादी का आसन वही —पुरानी बोर की चटाई पर,पीठ के
Read Moreमुलाकात की दो बूँद, साहेब,रिश्तों को पोलियो से बचाती है।वरना हाल पूछते-पूछते,मोहब्बत लकवाग्रस्त हो जाती है। अब चेहरे मुस्कान लिए
Read Moreकुछ समय पहले तक मुझे यह गलतफहमी थी कि सोशल मीडिया पर केवल रील्स और वीडियोज़ में वल्गर या बेहूदा
Read Moreसड़क, तुम अब आई हो गाँव,जब सारा गाँव शहर जा चुका है।जिन गलियों में बचपन की चीखें गूँजती थीं,अब वहाँ
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