Author: *डॉ. प्रियंका सौरभ

बाल कविता

नन्हा मुन्ना रजाई में

नन्हा बच्चा जाग गया,रजाई में मुस्काया।धीरे-धीरे आँखें खोली,मम्मी को बुलाया। नरम-नरम सी रजाई है,उसमें छिपकर खेले।कभी इधर तो कभी उधर,हँसते-हँसते

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राजनीति

न्यायपालिका में भ्रष्टाचार की चर्चा: सत्य का आईना या संस्था की गरिमा पर प्रहार?

न्यायपालिका भारत के लोकतंत्र का संरक्षक स्तंभ है, जो संविधान की रक्षा करता है और नागरिकों को न्याय का आश्वासन

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राजनीति

दौलत की फाइलें, भरोसे के सवाल

हरियाणा के आईपीएस अधिकारियों की संपत्ति का विवरण सार्वजनिक होने के बाद एक बार फिर प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिकता

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सामाजिक

शादी की बदलती तस्वीर: दिखावे, अहंकार और टूटते रिश्ते

भारतीय समाज में शादी केवल दो व्यक्तियों का संबंध नहीं रही है, बल्कि इसे हमेशा से परिवार, समाज और संस्कारों

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