Author: *डॉ. प्रियंका सौरभ

सामाजिक

किताबों से स्क्रीन तक: बदलते समय में गुरु का असली अर्थ

(ज्ञान के साथ संस्कार और संवेदनशीलता ही शिक्षक की सबसे बड़ी पहचान है)  डिजिटल युग में शिक्षा का स्वरूप तेजी

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राजनीति

पंजाब में बाढ़ आखिर क्यों – क्या प्रकृति रुष्ट है?

पंजाब में बाढ़ को केवल प्राकृतिक आपदा कहना सही नहीं होगा। नदियों का स्वरूप, असामान्य बारिश और जलवायु परिवर्तन तो

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शिक्षा एवं व्यवसाय

शिक्षा का बाज़ार और कोचिंग पर बढ़ती निर्भरता

जब विद्यालय शिक्षण का केंद्र नहीं रहते, तो शिक्षा व्यापार बन जाती है। हर तीसरा स्कूली छात्र प्राइवेट कोचिंग ले

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सामाजिक

जवान बच्चों की शादी में अभिभावकों की सहमति : परंपरा, अधिकार और सामाजिक संतुलन

दादा गौतम उर्फ़ हरियाणा के विधायक रामकुमार गौतम द्वारा विधानसभा में उठाया गया मुद्दा केवल विवाह की सहमति भर का

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सामाजिक

अर्धनग्न मुजरे के दौर में गुम होती साहित्यिक स्त्रियाँ

सोशल मीडिया की चमक-दमक के शोर में किताबों का स्वर कहीं खो गया है। इंस्टाग्राम और डिजिटल मीडिया का दौर

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राजनीति

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष : उपलब्धियाँ और नये क्षितिज

समर्पण, सेवा और संगठन की सौ वर्षीय यात्रा से विश्वगुरु भारत की ओर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष केवल

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