Author: *डॉ. प्रियंका सौरभ

शिक्षा एवं व्यवसाय

प्रेस स्वतंत्रता दिवस: “जब पत्रकारिता ज़िंदा थी…”

\प्रेस स्वतंत्रता दिवस अब औपचारिकता बनकर रह गया है। पत्रकारिता की जगह अब सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने ले ली है,

Read More
राजनीति

अंततः देश में जाति जनगणना: प्रतिनिधित्व या पुनरुत्थान?

भारत में दशकों से केवल अनुसूचित जातियों और जनजातियों की गिनती होती रही है, जबकि अन्य जातियाँ नीति निर्माण में

Read More