चंचल चितवन कुसुमाकर मन और नयन सपनों में
चंचल चितवन कुसुमाकर मन और नयन स्वप्नों में,ढूँढ रहा है अपनापन, बेगानों और स्वजनों में।अपनों ने ही छोड़ दिया जब,
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