देखो नया वर्ष आया है ……
सर्द ॠतु में, मन्द सर्द के साथ नवीन उत्कर्ष के साथ नवीन प्रसंग के साथ दोखो नया वर्ष आया है
Read Moreसर्द ॠतु में, मन्द सर्द के साथ नवीन उत्कर्ष के साथ नवीन प्रसंग के साथ दोखो नया वर्ष आया है
Read Moreनव वर्ष है नव उमंग लिए। नवल चाह नवल विचार लिए,। स्वर्णिम सुबह की आभा लेकर महाक्रान्ति अभियान लिए।। सबके
Read Moreठण्डी – ठण्डी वो हवा बहीं तन – मन मेरा सिहर उठा। गरजन – तड़पन के साथ बहीं, नभ में
Read Moreपूनम की चाँद, तुम मुझे शीतलता प्रदान करके। कहाँ चली गई। मुझे बीच में याद दिलाकर कहाँ चली गई। मैं
Read Moreअगर सृजन कर जाती प्रेम प्रस्फुटित कर। सृजन-सृजित-मधुर-मिलन संगीनी बनकर। फूलों से सुसज्जित कर हर लो मन की तपन, प्रेम
Read Moreकर्मचारी को, अपने अधिकार के लिए, लड़ना पड़ता है, आज के समय में। मजदूर की तरह, काम करने के बाद,
Read Moreदीपक की रोशनी को इतना बढ़ाएँ कि सबके हृदय में फूल खिल जाय। दीपावली पर दीप इतना जलाएँ, कि सबके
Read Moreदिया चुपचाप बैठीं थीं, अपने जगह पर। सोच रही थी आज दिवाली है, कैसे हम तम को हटाएँ? कैसे हम
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