कविता : “दर्द” ये उपहार
यू तो मै तुम्हारे बिना नही रह सकती पर अपने वजुद पर लांछन नही सह सकती मेरे निस्वार्थ समपर्ण पर
Read Moreयू तो मै तुम्हारे बिना नही रह सकती पर अपने वजुद पर लांछन नही सह सकती मेरे निस्वार्थ समपर्ण पर
Read Moreये सर्दीयो की लम्बी लम्बी राते तुम्हारी याद की तपिस बढा देती है उस पर ये खुबसुरत वहम कि तुम
Read More