ग़ज़ल
जब मुझे रिश्तों की धूप छाँव में जीना पड़ा,हर मोड़ पर किसी न किसी को खोना पड़ा। उम्र भर जिस
Read More(यादें शेष : सुमन कल्याणपुर)स्वर की सरिता में मधुर गीतों से घुलता ‘प्रेम’ निराला,कोमल तानों की पहचान, ‘सुमनजी’ का अद्भुत
Read Moreयूं ही जज़्बातों से बयां करते हैं,यहाँ कोई सबूत भी रखते नहीं।कुछ रिश्ते सिर्फ दिल में होते हैं,हर किसी को
Read More‘सत्ता’ बदली, बदले चेहरे, बदले शासन के व्यवहार,सवाल वही फिर उठा, किसका घर-क्या?अधिकार। कहतीं राबड़ी दृढ़ स्वर में, “नहीं छोड़ेंगे
Read Moreबस, ‘पंद्रह बरस’ की उम्र में ऐसा तूफ़ान उठा,हर गली-मोहल्ले में बस वैभव का नाम गूंजा।छोटे से कंधों पे सपनों
Read Moreसीमाओं पर धूल उड़ती रहीं, खतरे ने दे दी है दस्तक,मौन नहीं रहेगा देश हमारा, कभी ना झुकेगा मस्तक।घुसपैठ की
Read Moreबेटियों के जल्लादों का हिसाब कब होगा,ये सोई हुई व्यवस्था का जवाब कब होगा।हर रोज़ कहीं मासूमियत कुचली जाती है,इंसाफ़
Read Moreगंगा अवतरण का पावन पर्व,लेके आया है शुभ उजियारा।श्रद्धा, भक्ति और आस्था से,गूंज उठा हैं हर घाट किनारा। यूं ज्येष्ठ
Read Moreगलियों में डर का साया है,हर चेहरा अब घबराया है।नन्हें मासूमों की चीखों से,शहर-गाँव तक कपाया है। कभी इन बच्चों
Read Moreपुरुषोत्तम मास आया है, भक्ति का उपहार,हरि स्मरण से भर उठे, सारा जीवन संसार।अधिक मास कहलाता, पुण्य महीना खास,जप-तप, दान
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