उत्पत्ति स्थान से खिलवाड़
खामोश थीं दीवारें, पर ‘दर्द’ चीख रहा था,ये इंसान ही इंसान को नीचे गिरा रहा था। क्यों? स्त्री जननांग से
Read Moreखामोश थीं दीवारें, पर ‘दर्द’ चीख रहा था,ये इंसान ही इंसान को नीचे गिरा रहा था। क्यों? स्त्री जननांग से
Read Moreधुएँ में घुलती चीखें व सड़कों पर बिखरा शोर,अब मुट्ठियाँ उठी हुई हैं और आँखों में है जोर।पसीने की हर
Read Moreछत्तीसगढ़ के एक छोटे से गाँव में मालती अपने बीमार बच्चे को गोद में लिए बैठी थी। पास में खड़ी
Read Moreआज चेहरे से वो खुशी गायब थी,जो तूने साथ में रहकर कमाई थी।कितने ‘हँसी’ थे वो छोटे-छोटे पल,खुशियों को बाँटकर
Read Moreपेट्रोल पंप पर खड़े हुए आंखों में “भरोसा” भर लाते हैं,मीटर पर ‘जीरो’ चमकते ही हम चैन की सांसें पाते
Read Moreये हैं त्याग की गाथा, दर्द की कहानी,आज भी सुनाती है हर इक निशानी।कैसे सलीब पे यूं लटके प्रेम के
Read Moreचैत्र की पूर्णिमा का पावन उजियारा,ये हर दिल में गूंजे जयकारा तुम्हारा।हे अंजनी के लाल ओ पवनसुत वीर,तुम संकट हरने
Read Moreचूड़ियाँ केवल काँच नहीं ये मन की मजबूत दीवार,हर खनक में छुपी कहानी हर रंग में अनेक विचार।कहते हैं कायरता
Read Moreबदलें मौसम का “मिज़ाज” देख घबराया किसान,बादलों की आँख-मिचौली में उलझ गये अरमान।यहाँ कभी धूप तो कभी बरखा, खेल रही
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