अनजान शहर में
अनजान ‘शहर’ की गलियों में,मैं खुद को ढूँढता फिर रहा हूँ।हरेक चेहरा लगता अपना-सा,फिर भी ‘तन्हा-तन्हा’ रहता हूँ। यहाँ पर
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Read Moreगैस, पेट्रोल, डीज़ल के दाम,हर दिन लिखते नए पैगाम।जेब हो रहीं और भी हल्की,जीवन में छा रहीं हैं कड़की। पहियों
Read Moreसत्ता के शिखरों पर जो दीपक जलते थे,आज वही धुएँ में अपने निशान ढूँढ़ते हैं।भीड़ की तालियों से “गूँजते” थे
Read More(यादें शेष : सुमन कल्याणपुर)स्वर की सरिता में मधुर गीतों से घुलता ‘प्रेम’ निराला,कोमल तानों की पहचान, ‘सुमनजी’ का अद्भुत
Read Moreयूं ही जज़्बातों से बयां करते हैं,यहाँ कोई सबूत भी रखते नहीं।कुछ रिश्ते सिर्फ दिल में होते हैं,हर किसी को
Read More‘सत्ता’ बदली, बदले चेहरे, बदले शासन के व्यवहार,सवाल वही फिर उठा, किसका घर-क्या?अधिकार। कहतीं राबड़ी दृढ़ स्वर में, “नहीं छोड़ेंगे
Read Moreबस, ‘पंद्रह बरस’ की उम्र में ऐसा तूफ़ान उठा,हर गली-मोहल्ले में बस वैभव का नाम गूंजा।छोटे से कंधों पे सपनों
Read Moreसीमाओं पर धूल उड़ती रहीं, खतरे ने दे दी है दस्तक,मौन नहीं रहेगा देश हमारा, कभी ना झुकेगा मस्तक।घुसपैठ की
Read Moreबेटियों के जल्लादों का हिसाब कब होगा,ये सोई हुई व्यवस्था का जवाब कब होगा।हर रोज़ कहीं मासूमियत कुचली जाती है,इंसाफ़
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