भोजली : अच्छी फसल की मंगल कामना
सावन की रिमझिम फुहारों में, धरा हरियाली ओढ़े,खेतों की मेड़ों पर जैसे, कोई सपना चुपके से दौड़े।नागपंचमी पावन बेला, भोजली
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Read Moreन जेब में सिक्कों की खनक, न नोटों की कोई कतार,मोबाइल उठाया, पिन लगाया, पल में हुआ कारोबार।दस वर्ष पहले
Read Moreअब कहीं प्रधानमंत्री, “चीनी” पर फरमान न दे दें,बढ़ते दामों से जनता को, कोई नव ज्ञान न दे दें।कहें-मीठा कम
Read Moreशिक्षक बोले-“बारिश” का बहाना है, ज़रा देर लगेगी,प्राचार्य कहे-ये ई अटेंडेंस का जमाना एब्सेंट लगेगी। छाता लेकर निकले गुरुजी, राहों
Read Moreनो बीमा, नो पेट्रोल, सड़कों पे फिर कैसा रोल?नियम सबके लिए हैं, क्यों हों उनमें कोई होल?वाहन ले निकल पड़े
Read Moreसमाज की पहचान उसकी ऊँची इमारतों, चौड़ी सड़कों, बढ़ती अर्थव्यवस्था या आधुनिक तकनीक से नहीं होती। किसी भी सभ्यता का
Read Moreवहाँ पे खून से लाल हुई जो वर्दी,वह केवल मात्र ‘कपड़ा’ नहीं थी।उसमें एक घर की भी उम्मीद थी,माई की
Read Moreविकास की दौड़ में जब जंगल कट जाते हैं,नदियों के निर्मल दर्पण धुंधले पड़ जाते हैं।कुछ पल का लाभ भले
Read Moreचार दीवारों के भीतर, जब रिश्तों पर ताले लगते हैं,तब सबसे पहले बचपन की मुस्कानें रोती हैं।चार नहीं, साढ़े चार
Read Moreइंदौर | वरिष्ठ साहित्यकार सुजाता देशपांडे द्वारा संपादित एवं संकलित नवसृजित कहानी-संग्रह ‘कथा संचय’ का भव्य लोकार्पण समारोह रविवार को श्री
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