Author: संजय एम. तराणेकर

हास्य व्यंग्य

नो बीमा, नो पेट्रोल – अब समझ में आएगा जिम्मेदारी का माइलेज

हम भारतीय बड़े अद्भुत लोग हैं। नियमों का सम्मान करने में नहीं, उन्हें चकमा देने में विश्वगुरु बनने का सपना

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सामाजिक

क्या? समाज संवेदनहीनता की ओर बढ़ रहा हैं?

समाज की पहचान उसकी ऊँची इमारतों, चौड़ी सड़कों, बढ़ती अर्थव्यवस्था या आधुनिक तकनीक से नहीं होती। किसी भी सभ्यता का

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