मैं
मन बड़ा अस्थिर शायद तभी चंचल भी ठहराव पाने की जुगत में भौतिक शक्तियाँ कर देती भ्रमित फिर से भटकने
Read Moreस्त्री हिचकियाँ की सखी साथ फेरो का सकल्प दुःख सुख की साथी एकाकीपन खटकता परछाई नापता सूरज पहचान वाली आवाजों
Read Moreवतन के लोगों वतन को ,आतंक से बचालो आतंक के कहर को मिलकर वतन से निकालो सोने की चिड़िया के वतन
Read Moreआदिवासी बाहुल्य क्षेत्रो मे भगोरिया पर्व आते ही वासन्तिक छटा मन को मोह लेती है वही इस पर्व हेतु पूर्व
Read Moreइशारों से जब दिल की बात बताए लोग कहते है ये अदाओं का जमाना है परिंदे ने जब प्रेम -पंख
Read Moreपत्तियों का डाली से छूटना आया पतझर मे जेसे वृक्ष को रोना आया परिंदों का था ये पत्तियों का पर्दा
Read Moreरंगो की कोई जात नहीं होती भाई – चारे के देश में दुश्मनी की बात नहीं होती ये खेल है
Read Moreनन्ही हथेली में पकड़ना चाहती है चाँद को । जिद्दी करके पाना चाहती है चाँद को । छुप जाता
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