कविता : अनुशासन
कोहरे मे लिपटे वृक्ष /पहाड़ कितने हसीं लगते है जेसे प्रकृति ने चादर ओढ़ली हो सुबह की ठण्ड से
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Read Moreजब योवन पर आती नदियाँ मछलियाँ तब नदी के प्रवाह के विपरीत प्रवाह पर तेरती छोटी -छोटी धाराओं पर
Read Moreधमाकों की गूंज से पीड़ित शांति के कई दूत (कपोत ) अपने बच्चों को छुपा रहे अपने पंखों से सोच
Read Moreअमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की जन्मस्थली भाभरा को चंद्रशेखर आजाद नगर घोषित किये जाने पर समर्पित कविता- शहीदों की क़ुरबानी
Read Moreमेरे वतन के लोगो वतन के लोगो वतन को ,आतंक बचालो आतंक के कहर को मिलकर वतन से निकालो सोने
Read Moreये सोचकर बैल ख़रीदे किसान ने अपनी पहली फसल बेचकर घर को एक बारिश और खाने दे बाद में ठीक
Read Moreआतंकवादी कैसे पा जाते है बारूद क्या ढोकर लाते या चुराकर और तो और वे बना लेते है बम जब
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