गज़ल
है अगर मुमकिन तो साथ दीजिए,रूठे हैं अगर कोई तो बात कीजिए। यहाँ हर शख्स बेवजह परेशान सा रहता है,किसी
Read Moreआज के इस बढ़ते आधुनिक युग में अंग्रेजी भाषा का बढ़ता प्रभाव और हिंदी भाषा के प्रति उदासीनता बढ़ती ही
Read Moreइन दिनों मेरी कविता मौन है,क्या पता इसके पीछे कौन है।शब्द, भाव, विचार के बीचअंतरद्वन्द चल रहा है,झरने की तरह
Read Moreमहानगर में अधिकतर कामकाजी लोगों के लिए घर के काम करने के लिए श्रमिक मिलना बहुत कठिन होता है। घर
Read Moreसपनों को बुनने में उनको चुनने में बहुत खास बनने में,,, वक्त तो लगता है,!
Read Moreजैसे-जैसे आधुनिकता हम सभी पर हावी होती जा रही है ,वैसे -वैसे हम परिवार से दूर और बाहरी आभासी दुनिया
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