ठोकर खाकर गिरना और ….
ठोकर खाकर गिरना, और सम्हलना आ गया। हमको जीवन की राहों में, चलना आ गया॥ देख लिया हमने लोगों का,
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Read Moreहर तरफ नफरत की फसलें बो रहा है आदमी। क्यूं न जाने आदमीयत खो रहा है आदमी॥ हँस रहा है
Read Moreमैंमैं प्रणय निवेदन करता हूं, स्वीकार करो स्वीकार करो। मन मंदिर आन बसो मेरे, मन वीणा में झंकार भरो॥ अंतर
Read Moreदोस्त सब अपने पुराने छोड आया हूं। ज़िन्दगी के सब तराने छोड आया हूं॥ गाँव का तालाब पीपल की घनी
Read Moreचेहरे पर चेहरा लगाकर जी रहा है आदमी। खुद से भी खुद को छुपाकर जी रहा है आदमी॥ कहने को
Read Moreयह दुनियां रंग मंच है, किरदार है हम सारे। करना है वही हाल, लिखा है जो उसने प्यारे॥ नियति ने
Read Moreनवल किशोरी चली, ब्रज की चकोरी चली मुरली की तान सुन, मन नाहि धीर है। जिसे देखो हर कोई, सुध
Read Moreरास्ते अंजान से है हमसफ़र कोई नही। भीड है काफी यहाँ अपना मगर कोई नही॥ देख कर उसको लगा की
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