गीत/नवगीत

यह दुनिया रंग मंच है…

यह दुनियां रंग मंच है, किरदार है हम सारे।
करना है वही हाल, लिखा है जो उसने प्यारे॥

नियति ने सब तय किया यहाँ, कब किसका कैसा रोल कहाँ।
किसकी कितनी कीमत होगी, और किसका कितना मोल यहाँ॥
वो रखता नाप तोल सबकी, कब कितना देना रे …
करना है वही हाल, लिखा है जो उसने प्यारे……

नायक कोई खलनायक है, नालायक कोई लायक है।
कोई दर दर ठोकर खाता, कोई जग का अधिनायक है॥
कोई दुख दर्द का मारा है, कोई भोगे सुख सारे…..
करना है वही हाल, लिखा है जो उसने प्यारे….

सनुबंधो से अनुबंधित है, कोई घृणित है कोई वंदित है।
कोई दुख दरिया में डूबा, कोई सुख सागर आनंदित है॥
उसने सब सोच विचार दिया, किसके हिस्से क्या रे…..
करना है वही हाल, लिखा है जो उसने प्यारे….

जिसको जैसा किरदार दिया, सब कर्मों के अनुसार दिया।
मरकर भी कोई जिंदा है, कोई जीते जी मार दिया॥
कोई भव सागर तार दिया, और कोई डूबा रे…..
करना है वही हाल, लिखा है जो उसने प्यारे….

सतीश बंसल

*सतीश बंसल

पिता का नाम : श्री श्री निवास बंसल जन्म स्थान : ग्राम- घिटौरा, जिला - बागपत (उत्तर प्रदेश) वर्तमान निवास : पंडितवाडी, देहरादून फोन : 09368463261 जन्म तिथि : 02-09-1968 : B.A 1990 CCS University Meerut (UP) लेखन : हिन्दी कविता एवं गीत प्रकाशित पुस्तकें : " गुनगुनांने लगीं खामोशियां" "चलो गुनगुनाएँ" , "कवि नही हूँ मैं", "संस्कार के दीप" एवं "रोशनी के लिए" विषय : सभी सामाजिक, राजनैतिक, सामयिक, बेटी बचाव, गौ हत्या, प्रकृति, पारिवारिक रिश्ते , आध्यात्मिक, देश भक्ति, वीर रस एवं प्रेम गीत.