डिजिटल यादें और भूलने का अधिकार
‘भूल जाने का अधिकार’ (राइट टू बी फॉरगॉटन—आरटीबीएफ) आज के डिजिटल युग की सबसे जटिल और बहुआयामी कानूनी-नैतिक बहसों में
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Read Moreघर अब भी जाता हूँ,वही आँगन, वही दरवाज़ा—बस फ़र्क इतना है,अब कोई मेरा इंतज़ार नहीं करता। रसोई से खुशबू तो
Read Moreभारतीय तकनीकी शिक्षा के प्रतिष्ठित संस्थान, जिन्हें कभी “सपनों की फैक्ट्री” कहा जाता था, आज कई युवाओं के लिए मानसिक
Read Moreविश्व एक ऐसे विरोधाभास के बीच खड़ा है, जहां एक ओर भारी मात्रा में खाद्य पदार्थ बर्बाद हो रहे हैं
Read Moreउत्तर भारत के गाँवों में गेहूँ की कटाई केवल एक मौसम नहीं, बल्कि जीवन का उत्सव होती है। यह वह
Read Moreनन्हा सा बच्चा बैठा कार में,किताब लिए है अपने हाथ में।चित्रों की दुनिया रंग-बिरंगी,खोया है वो मीठी बात में। फूलों
Read Moreमकान का मुहूर्त हो या दुकान का उद्घाटन, शादी-ब्याह की खुशियाँ हों या किसी अपने की मृत्यु का गम—हर जगह
Read Moreहाल ही में सामने आई एक युवा डॉक्टर की कहानी ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। कैमरे
Read Moreपापा की गोद में बैठा मैं,दुनिया लगती प्यारी।हाथों में उनके जादू है,मुस्कान है सबसे न्यारी। छोटी-छोटी बातें मेरी,ध्यान से वो
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