आस्था का बाज़ारीकरण: वीआईपी दर्शन और आम श्रद्धालु की उपेक्षा पर एक गंभीर सवाल
भारत जैसे देश में, जहाँ धर्म और आस्था केवल व्यक्तिगत विश्वास का विषय नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का
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Read Moreदुनिया एक बार फिर उसी मोड़ पर खड़ी दिखाई देती है, जहाँ शक्ति प्रदर्शन, धमकियों और सैन्य गतिविधियों के बीच
Read Moreकमजोर वर्गों के लिए बनाई गई विकास और कल्याणकारी योजनाओं को अक्सर ‘भेदभावपूर्ण’ कहकर आलोचना की जाती है। पहली नज़र
Read Moreगधों पर दाँव लगाओगे तो रेस क्या जीतोगे,ऐसी चोट खाओगे कि चलना भी भूल जाओगे। झूठों के साथ रहोगे तो
Read Moreभारत के शहरों में अतिक्रमण कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन जिस तरह से इस पर कार्रवाई की जाती है,
Read Moreहरियाणा के उच्च शिक्षा क्षेत्र में हाल ही में सामने आया भ्रष्टाचार का मामला न केवल राज्य की चार प्रमुख
Read Moreरिश्तों में अब न पहले-सा वो एहसास है,हर शख़्स के लहजे में स्वार्थ का लिबास है। मिलते हैं मुस्कुरा के
Read Moreशिक्षा को सदैव समाज की आत्मा, विकास का आधार और समान अवसरों का सेतु माना गया है। यह केवल ज्ञान
Read Moreभारत की शिक्षा व्यवस्था आज एक गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। पिछले एक दशक में लगभग 94
Read Moreनन्हा-मुन्ना बच्चा आया,हाथ में फ़ोन उठाया।हैलो-हैलो बोल रहा है,जैसे दुनिया से बतियाया। कभी इधर तो कभी उधर देखे,को k?आँखों में
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