सैनिकों के सम्मान में
जहाँ हमारी सीमाओं पर तुम जैसे हों प्रहरी,नहीं किसी में है हिम्मत जो लाँघ सके है देहरी। जल थल नभ
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Read Moreआज तूलिका है स्तब्धकह रही हाय!राम धत्त। आज स्याह रंग भीरक्त है उगल रही,पूछती है सभी सेक्या अब भी वही
Read Moreयह जो चेहरे पर रेखाएँ हैंकलाकृति और चित्रकारी हैस्वतः ही तराशी गईं शिल्पकार कीसमाहित हैं शिल्प कई सदी के। एक-एक
Read Moreसुना है की वो! आजकल हैं शहर मेंकहता है दिल की मुलाकात होगी,मिलेंगे दो नैना जो उनकी नयन सेतो संभव
Read Moreमन रहता बदहवास सा तेरे बगैर अब,लगे बुझी बुझी सी शाम तेरे बगैर अब। खिड़की से ताकते रहते सुदूर चांद
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