गीतिका
सिर झुका के ही चलूँ मैं, यह जमाना चाहता है,क्यों उठा है सिर मेरा, सिर को झुकाना चाहता है। आज
Read Moreजीवन नैया डूब रही प्रभु आकर पार लगाओकठिन समय है राह न सूझे आकर राह दिखाओ शूल पांव में गड़े
Read Moreनमन करे भागीरथी,तुझे झुका कर शीश |तेरे तट पर आ गये, पाने शुभ आशीष || पावन गंगा ने दिया,अपना आशीर्वाद
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