गीतिका
हम हैं नादान हमको बताते रहे मात देकर नसीहत सिखाते रहे जीतते वो रहे,बाजियां चाल से जश्न भी जीत का
Read Moreतुझ पर मैं कुर्बान हूँ, तू मेरी पहचान देश नमन,वन्दन तुझे,तू मेरा अभिमान तेरी धरती ने दिया,भोजन,अन्न,अनाज खेतो में
Read Moreशब्द मौन हैं व्यथा देखकर,धरती का उजड़ा श्रृंगार बंजर हो गई भूमि अपनी,उगे वनो पर करे प्रहार, मानव की सुविधा
Read Moreमैं नदिया हूँ,चंचल हूँ मैं करती हूँ मनमानी शीतलता देता है मेरा निर्मल बहता पानी हर तरंग मदमस्त उछलती लहरो
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