ग़ज़ल
तुम्हें छोड़कर अब तो जाना पड़ेगा जहां दूसरा अब बसाना पड़ेगा बहुत सह चुके हैं सितम हम तुम्हारे तुम्हारा भी
Read Moreनेता करते हैं यहां, बस अपना उत्थान जनता को ही देखिए, करने सब बलिदान करने सब बलिदान, गिला मत करना
Read Moreपाल पोस कर कर दिया,जिसने वत्स जवान वृद्ध आश्रम छोड़ कर, भूल गया पहचान मात पिता के कर्ज को, सकता
Read Moreजीवन में हो सादगी, ऊंचे रहे विचार सफर जिन्दगी का कठिन, नही मानना हार अच्छी चीजों को चुनो, अपनाओ सद्भाव
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