उपन्यास : देवल देवी (कड़ी 58)
53. सम्राट और साम्राज्ञी अंततः देवलदेवी और धर्मदेव के अतुलनीय बलिदानों एवं शौर्यकार्यों से विधाता देव रीझ उठे और पंद्रह अप्रैल,
Read More53. सम्राट और साम्राज्ञी अंततः देवलदेवी और धर्मदेव के अतुलनीय बलिदानों एवं शौर्यकार्यों से विधाता देव रीझ उठे और पंद्रह अप्रैल,
Read Moreउसे सरोकार नहीं होता कश्मीर में बेघर हुए हिन्दुओ के दर्द से वो तो बस छटपटाती है अफज़ल के नाम
Read More52. मंगल बेला नाऊन ने स्नान कराया, सोलह श्रृंगार किए, बारह आभूषण पहनाए। सखियों ने मंगल गान गाए। पुरोहित ने मंत्र
Read More51. विजय घोष वह शुभ घड़ी आई चार अप्रैल तेरह सौ बीस को। खुशरव शाह और देवलदेवी ने शाही हरम के
Read Moreमैने किया था इश्क़ कबूल करता करता हूँ मै मैने भी तोड़े थे चाँद तारे तेरे लिए ख्यालो में ही
Read More50. अंतिम प्रबंध मदुरा, तैलंगाना की विजय के बाद खुशरव शाह वापस देवगिरी पहुँचा। तैलंगाना में उसे वहाँ के सेनापति अनिल
Read More49. भावी सम्राट की भूमिका ‘सुल्ताना देवल, आपको हासिल करके हमें बहुत खुशी मिली है।’ मुबारक शाह देवलदेवी के रूखसारों पर
Read More48. देह विडंबना का पूर्ण प्रतिशोध दो घड़ी रात गए द्वार पर कोलाहल सुन देवलदेवी वस्त्र संभालकर शय्या से उठ गई।
Read More47. स्त्रैण सुल्तान देवगिरी में शाही खेमा लगा है। उस खेमे में सुल्तान मुबारक और वजीर खुशरव शाह मौजूद हैं। देवगिरी
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