आत्मकथा – दो नम्बर का आदमी (कड़ी 50)
1993 का वर्ष हमारे लिए लगभग सामान्य रहा। मैं आर्थिक चिन्ताओं से मुक्त था और अपनी पत्नी तथा 2-3 साल
Read More1993 का वर्ष हमारे लिए लगभग सामान्य रहा। मैं आर्थिक चिन्ताओं से मुक्त था और अपनी पत्नी तथा 2-3 साल
Read Moreवाराणसी में मेरा संघ से सम्पर्क प्रारम्भ में ही हो गया था। वास्तव में मैं सबसे पहले गोदौलिया के संघ
Read Moreरातभर आनन्द से सोने के बाद हम सुबह जल्दी उठकर गाड़ी पकड़ने भागे। ठीक समय पर गाड़ी आ गयी और
Read Moreउसी वर्ष अर्थात् सन् 1992 की गर्मियों में नदेसर (वाराणसी) में हमारी कालोनी से सटी हुई राजा नदेसर की कोठी
Read Moreसन् 1992 के अप्रैल माह में श्रीमतीजी की मम्मीजी ने अपनी सभी बेटियों और दामादों के साथ वैष्णो देवी की
Read Moreराम मंदिर आन्दोलन में मेरे विचारों के प्रकाशन के दौरान मेरे कई नये मित्र बने। उनमें दो नाम विशेष रूप
Read Moreउन दिनों श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन पूरे जोर-शोर से चल रहा था। राष्ट्रवादी विचारों का कार्यकर्ता होने के नाते मैं आर्यसमाजी
Read Moreपिछली कड़ियों में अपनी जापान यात्रा का पूर्ण विवरण दे चूका हूँ। जापान से लौटने वाले दिन सड़क पर जाम के
Read More28.10.1990 (रविवार) ये पंक्तियाँ मैं टोकियो से दिल्ली उड़ान के दौरान लिख रहा हूँ। मेरी पिछली रात उसी तरह सीटों
Read Moreअब मैंने अपनी बुद्धि से थोड़ा काम लिया। सबसे पहले तो मैंने यह तय किया कि होटल में ठहरने का
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