आत्मकथा – दो नम्बर का आदमी (कड़ी 40)
26.10.1990 (शुक्रवार) आज हमारा टोकियो में अन्तिम दिन था। मेरी उड़ान इटालियन एयर लाइन्स अलइटालिया के साथ बुक थी, जो
Read More26.10.1990 (शुक्रवार) आज हमारा टोकियो में अन्तिम दिन था। मेरी उड़ान इटालियन एयर लाइन्स अलइटालिया के साथ बुक थी, जो
Read Moreवहाँ से श्री हिरानो मेरे लिए हीयरिंग रोड दिलवाने एक जगह ले गये जिसे इलैक्ट्रिकल सिटी (बिजली का नजर) कहा
Read Moreजापान में पहली बार मैं रेल में तब चढ़ा जब हमें तुकूबा जाना था। करीब 11 बजे हम रेलवे स्टेशन
Read Moreएन.टी.टी. की विलक्षण खोजें देखकर ही हमने बस नहीं की, बल्कि अभी और भी चमत्कार देखने थे। उसी का एक
Read Moreकुछ दिन पहले शिव सेना के एक सांसद ने एक लेख में यह मत व्यक्त किया था कि देश की
Read Moreबस ने हमें वहाँ उतारा जहाँ ‘डाटा शो’ नामक प्रदर्शनी लगी थी। उस दिन प्रदर्शनी का उद्घाटन था, जो 10
Read Moreश्री हिरानो के निर्देशों के अनुसार मुझे वहाँ से बस में टोकियो सिटी एअर टर्मिनल जाना था। 2500 येन में
Read Moreअगले दिन (19 अक्टूबर को) मैं टैक्सी से दिल्ली गया, क्योंकि कुतुब एक्सप्रेस 2-3 घंटे लेट थी। 11 बजे पहुंचा
Read Moreअब मैं परिणाम का इन्तजार करने लगा। विज्ञापन में उल्लेख था कि सितम्बर के अन्तिम सप्ताह में उन लोगों को
Read Moreमेरी पहली विदेश यात्रा (जापान यात्रा) कम्प्यूटर मेरा प्रिय विषय है। यह वास्तव में गणित की ही एक विकसित शाखा
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