उपन्यास : शान्तिदूत (उन्तालीसवीं कड़ी)
राजसभा में पांचाली के वस्त्रहरण का कृष्ण द्वारा उल्लेख करने पर युवराज दुर्योधन आगबबूला हो गया, जैसे किसी ने उसको
Read Moreराजसभा में पांचाली के वस्त्रहरण का कृष्ण द्वारा उल्लेख करने पर युवराज दुर्योधन आगबबूला हो गया, जैसे किसी ने उसको
Read Moreकृष्ण की यह बात सुनकर धृतराष्ट्र भीतर तक कांप गये। तब तक विदुर के अलावा किसी ने उनको यह बताने
Read Moreदुर्योधन की यह गर्वोक्ति सुनकर कृष्ण क्रोधित नहीं हुए, बल्कि दयनीय दृष्टि से दुर्योधन की ओर देखा और मंद-मंद मुस्कराते हुए
Read Moreबोलने के लिए अवसर मिलते ही कृष्ण ने महाराज को सम्बोधित करके किन्तु राजसभा की ओर मुख करके कहना प्रारम्भ
Read Moreकृष्ण के आने से पहले ही राजसभा में सभी लोग उपस्थित हो गये थे और अपने-अपने स्थान पर बैठे थे।
Read Moreअगले दिन प्रातःकाल कृष्ण और सात्यकि नित्यकर्मों से निवृत्त हुए। फिर राजसभा में जाने के लिए तैयार होने लगे। वहां
Read Moreअतिथि शाला में सात्यकि और अपने सारथी के निवास की व्यवस्था देखकर कृष्ण अकेले ही अपनी बुआ कुंती से मिलने
Read Moreकृष्ण द्वारा सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का सिर काटने के दृश्य को याद करके सब भयभीत हो गये। उन्होंने देखा
Read Moreकृष्ण के स्वागत से लौटते हुए दुर्योधन के मन में बहुत रोष था। वह अपने रोष का प्रदर्शन करना नहीं
Read Moreदो दिन पहले एक विडियो इन्टरनेट पर दिखाई दिया था, जिसमें एक इस्लामी आतंकवादी बहुत क्रूरता से एक अमेरिकी पत्रकार
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