उपन्यास : शान्तिदूत (तीसवीं कड़ी)
जब पांडवों का दूत यह समाचार लेकर हस्तिनापुर पहुँचा कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण पांडवों की ओर से समझौते के लिए
Read Moreजब पांडवों का दूत यह समाचार लेकर हस्तिनापुर पहुँचा कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण पांडवों की ओर से समझौते के लिए
Read Moreजैसे ही रथ उपप्लव्य नगर की सीमा से बाहर निकला, वैसे ही सात्यकि ने अपनी जिज्ञासा, जो उसने बहुत समय
Read Moreपांडवों के जाते ही कृष्ण ने सात्यकि को बुलवाया। सन्देश मिलते ही वह उपस्थित हो गया। कृष्ण ने उनसे कहा-
Read Moreपांडवों ने कृष्ण को हस्तिनापुर जाने के बारे में सहमति दे दी थी, लेकिन कई बातें अभी भी उनके मस्तिष्क
Read Moreप्रातः ही कृष्ण अपने नियमित समय पर उठे। नित्य की क्रियाओं से निवृत्त होकर उन्होंने युधिष्ठिर के पास संदेश भेज
Read Moreपांडवों की ओर से सन्धि का प्रस्ताव लेकर हस्तिनापुर जाने का निश्चय कर लेने के बाद कृष्ण इस बात पर
Read Moreउसी रात्रि को अपने कक्ष में अपने पलंग पर लेटे हुए कृष्ण बहुत गहरे विचारों में डूबे हुए थे। उनके
Read Moreनेपाल की कोसी नदी नीचे उतरकर बिहार में होकर बहती है. लगभग हर साल ही उसमें नेपाल से एक साथ
Read Moreकृष्ण को अच्छी तरह याद था कि उसी दिन राजसभा में कौरवों के सन्देशवाहक के आने पर क्या-क्या बातें हुई
Read Moreमेरे एक मित्र ने एक सवाल पूछा है कि विद्रोह और आतंकवाद में क्या अन्तर है? इस सवाल का सही-सही
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