उपन्यास : शान्तिदूत (बाईसवीं कड़ी)
अब कृष्ण इस राजसभा के बाद की घटनाओं पर विचार करने लगे। पांडवों के पुरोहित ऋषि धौम्य युधिष्ठिर का सन्देश
Read Moreअब कृष्ण इस राजसभा के बाद की घटनाओं पर विचार करने लगे। पांडवों के पुरोहित ऋषि धौम्य युधिष्ठिर का सन्देश
Read Moreराजा विराट ने विराट नगर के पास ही उपप्लव्य नगर में पांडवों के निवास का स्थान दे दिया था। वहीं
Read Moreअब कृष्ण कौरवों के आक्रमण और उसके बाद की घटनाओं पर विचार करने लगे। ये घटनायें अधिक पुरानी भी नहीं
Read Moreकृष्ण पांडवों के साथ अज्ञातवास में घटी घटनाओं पर विचार करने लगे। विराट नगर में पांडव किसी से अधिक सम्पर्क
Read Moreअब कृष्ण पांडवों के अज्ञातवास की अवधि की घटनाओं पर विचार करने लगे। अज्ञातवास का समय पांडवों के वनवास का
Read Moreपिछले दिनों चार प्रमुख घटनायें घटीं-1. उत्तर प्रदेश सरकार ने रमजान का तथाकथित पवित्र महीना शुरू होते ही अनेक मन्दिरों
Read Moreपांडवों के वनवास के बारे में सोचते हुए कृष्ण को दुर्योधन के वनविहार की घटना का स्मरण हुआ। अपनी जन्मजात
Read Moreअब कृष्ण वनवास में पांडवों के साथ घटी घटनाओं पर विचार करने लगे। वनवास में पांडव घास-फूस की कुटी बनाकर
Read Moreकृष्ण कौरवों की राजसभा में हुई आगे की घटनाओं पर विचार करने लगे, जैसा कि उनको बाद में ज्ञात हुआ।
Read Moreकृष्ण को कुरुओं की राजसभा में द्रोपदी के अपमान की सभी बातें बाद में ज्ञात हुईं। उनको इन घटनाओं का
Read More