आत्मकथा – दो नम्बर का आदमी (कड़ी 5)
एच.ए.एल. में अपनी सेवा प्रारम्भ करने के तीन-चार माह बाद ही मेरी नौकरी खतरे में पड़ गयी। कारण बने ज.ने.वि.
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Read Moreफैक्टरी होने के कारण एच.ए.एल. में शिफ्टों में काम होता है। वैसे सभी प्रशासनिक कार्यालय केवल एक शिफ्ट में चलते
Read Moreअब एच.ए.एल. के बारे में विस्तार से बताना उचित होगा। हिन्दुस्तान ऐरोनाॅटिक्स लि. एक लड़ाकू हवाई जहाज बनाने की सरकारी
Read Moreअपनी आत्मकथा के पहले भाग ‘मुर्गे की तीसरी टाँग उर्फ सुबह का सफर’ में मैं लिख चुका हूँ कि किस
Read Moreप्राक्कथन जड़ चेतन गुन दोषमय विश्व कीन्ह करतार। संत हंस गुन गहहिं पय परिहरि वारि विकार।। सियाराम मय सब जग
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