संस्मरण

होली के बहाने

“दीदी, रमैया कल से काम पर नहीं आएगी अब वह 15 दिन के बाद ही वापस काम पर आएगी।” मेरे घर में काम करने वाली 18 वर्षीय रमैया की मां सावित्री बाई ने जब मुझे यह बात बोली तो मैं हैरान हो गई। तब मुझे यही लगा कि शायद रमैया की तबीयत खराब है या […]

संस्मरण

यादें

ननिहाल की बात ही अलग होती थी साल भर इंतजार करने के बाद महीने भर की छुट्टी और उन गर्मी की छुट्टियों में साल भर का प्यार का मिल जाता था वो दौर ही अलग था लोगों के मकान छोटे और दिल बड़े हुआ करते थे । घड़ी सिर्फ़ नाना जी के हाथों में हुआ […]

संस्मरण

नेऊरा भ‌इया!

मैं नोयडा में हूं। नोयडा, विकास के पैमाने पर विकसित है, यह पैमाना पश्चिम का है। इन दिनों इस विकास को महसूसने का प्रयास कर रहा हूं। यहाँ की सड़कें चमचमाती और गुलजार रहती हैं। हम एक सोसायटी में रहते हैं। ऊँची-ऊँची बिल्डिंगों के रहवासियों से बनती हैं ये सोसायटियां। सड़कों से गाड़ियां इन सोसायटियों […]

संस्मरण

शीर्षक: विंडो वाली सीट

बात उस समय की है जब मैं कक्षा नवीं दसवीं की छात्रा रही होंगी। मेरे मामा जी रोहतक हरियाणा में रहते थे। मई-जून की गर्मियों की छुट्टियों में हम अक्सर सपरिवार उनके पास उनके घर रहने जाया करते थे। मामा जी के घर जाने से कहीं ज्यादा उत्सुकता और खुशी हमें ट्रेन में बैठने की […]

संस्मरण

मेरी प्यारी नानी

सफेद सूट, लंबे-लंबे सफेद बाल, गोरा रंग, चमकता चेहरा, माथे पर तेज, आवाज में मिठास, हर बात पर मुस्कुराहट, हम सभी नाती-पोतों को खाना अपने ही हाथों से खिलातीं। सफाई पसंद इतनी कि मजाल है जो कपड़े पर एक दाग लग जाए या किसी को कम ज़्यादा मिल जाय। ऊपर से नीचे तक सफेद लिबास […]

संस्मरण

लोग सरकारों को कोसना बंद कर देंगे जब अपनी गिरेबां झांक लेंगे।

आजादी से पहले देश के एक ओ भी नेता थे जिन्होंने अपनी जान पर खेल कर गुलाम देश को आजाद कराया था और भारत को एक नवजात शिशु की भांति देशवासियों को सौंप कर इस देश से हमेंशा -हमेंशा के लिये मां भारती की गोद में चिर निद्रा में सो गये, आज हमारा देश सिर्फ […]

संस्मरण

संस्मरण – इनाम की अट्ठन्नी

# साहित्य संगम संस्थान राजस्थान इकाई # विषय – झाँसी की रानी (स्वैच्छिक) # विधा – संस्मरण शीर्षक- इनाम की अट्ठन्नी रानी लक्ष्मीबाई वीरता की प्रतिमूर्ति थीं. उनकी वीरता का गुणगान अंग्रेजों ने भी किया था. खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी. रानी लक्ष्मीबाई से संबंधित एक संस्मरण मैं कभी नहीं भुला […]

संस्मरण

अजनबी चेहरे

कल की ही बात ( 20 नवंबर2022) है , मैं अपने ही शहर  में अपनी बेटी को  पुलिस लाइंस के पास कोचिंग छोड़ने गई थी। तब मैंने सोचा , स्कूटी में तेल नहीं है चलो पास में यही पेट्रोल पंप है ले लेती हूंँ , रोज आते – जाते पेट्रोल पंप पर तेल भरनेवाले  पहचानने […]

संस्मरण

मेरी पकी सहेली

मेरा नाम दिशा है,मैं नौवीं कक्षा में पढ़ती हूं मेरी एक सहेली थी जिसका नाम पायल था जो मेरे साथ पहली से आठवीं तक पढ़ती थी अब मैं नौवीं कक्षा में प्रवेश कर चुकी हूं मेरी एक नई सहेली बनी है जिसका नाम खुश्बू है मैं अपनी पुरानी सहेली को छोड़ चुकी हूं। मैंने 1 […]

संस्मरण

संस्मरण – तुलसी तेरे रूप अनेक

बात राजस्थान के ही किसी जिले की कुछ साल पहले की है। वहाँ महिलाओं के कल्याण से संबंधित विभागों, संस्थानों और स्वयंसेवी संस्थाओं की मिली-जुली जिलास्तरीय समीक्षा बैठक चल रही थी।             महिलाओं के सर्वांगीण विकास को लेकर हो रही चर्चा के दौरान मुद्दा उठा कि इस क्षेत्र की महिलाओं में गुटखों और तम्बाकू का […]