लघुकथा – प्रायश्चित
मालिक सेवाराम की तबियत बहुत खराब है। सांस चल रही है। आईसीयू में भर्ती हैं। एक बड़ी कंपनी के मालिक
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Read Moreपुराने मकान की सफ़ाई करते समय बेटे को पिता की वर्षों पुरानी बंद घड़ी मिली। उसने हँसते हुए कहा, “इसे
Read Moreकाली आँधी, तूफानी बारीश, घनघोर अँधेरा। कड़कड़ाती बिजली, बादलों की गड़गड़ाहट। झमाझम बरसती बूँदे और तेज हवा से महक का
Read Moreवृद्धाश्रम में रहने वाले एक बुज़ुर्ग रोज़ सुबह सबसे पहले रजिस्टर खोलते और अपने काँपते हाथों से अपने नाम के
Read Moreपढ़ाई में होशियार नवोदित धाविका सीता के सपने बड़े थे, मगर परिवार की माली हालत अच्छी नहीं थी। जूनियर वर्ग
Read Moreहर वर्ष की भांति इस बार भी माहेश्वरी जी अनाथ कन्याओं के कन्यादान का पुनीत कार्य कर रही थीं। विवाह
Read More“मम्मी, अभी नहीं… शाम को ले आएँगे।” मेरे इतना कहते ही माँ की आँखें कहीं दूर टिक गईं। धीमे स्वर
Read Moreबारिश कह रही थी मानो आज ही बरसना है, सिर्फ एक किलोमीटर दूर मंज़िल.. पर मंज़िल तक जाना ही सबसे
Read Moreऑफिस की लिफ्ट खराब थी। 8वीं मंजिल। बॉस ने सुबह ही कह दिया था – “रिपोर्ट आज चाहिए, नहीं तो
Read Moreमेरे पिताजी छह भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। उन्होंने उम्र से पहले जिम्मेदारियों का भारी बोझ अपने कंधों पर उठा
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