फसल का सौदा
सखाराम के हाथों की लकीरें मेहनत की मज़दूरी करते-करते घिस चुकी थीं, लेकिन उसकी आँखों में एक सपना अभी भी
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Read Moreकॉलेज के वो दिन भी क्या ख़ूबसूरत होते हैं, जहाँ किताबों के पन्नों से ज़्यादा नज़रें हसीन चेहरों के मुताले
Read Moreबात उन दिनों की है जब मैं स्थानांतरित होकर इस घाटी में नया नया आया था और धारपुर के प्राइमरी
Read Moreदिल्ली की गलियां और वो पुर-असरार चेहरा पुरानी दिल्ली की वो तंग और तारीख़ (अंधेरी) गलियां, जहां हवाओं में आज
Read Moreआज पूरे ऑफिस में अजीब-सी हलचल थी। किसी की मेज पर मिठाई के डिब्बे थे, तो किसी के हाथ में
Read Moreविमल सुबह नौ बजे ही पहुँच गया था मेरे घर। हम दोनों को अपने पुराने मित्र से मिलने शहर से
Read Moreकॉलेज की फिज़ाओं में एक नाम गूंजता था, अमन आरिफ़। वह एक संजीदा फ़िक्र नौजवान, जिसकी दुनिया किताबों, शायरी और
Read Moreशहर की सुबहें हमेशा भागमभाग वाली होती हैं। ट्रैफ़िक का शोर, हॉर्न की आवाज़ें, और टैक्सी स्टैंड पर भीड़। उसी
Read Moreखटपट की आवाज़ से नंदिता की नींद खुली। उठकर देखा तो माँ कावेरी आज तड़के ही उठ कर घर के
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