उपन्यास : देवल देवी (कड़ी 51)
46. अंतिम परियोजना हसन, जिसे सुल्तान मुबारक शाह खिलजी ने खुशरव शाह का खिताब अता किया था, उसके वक्ष से लिपटी
Read More46. अंतिम परियोजना हसन, जिसे सुल्तान मुबारक शाह खिलजी ने खुशरव शाह का खिताब अता किया था, उसके वक्ष से लिपटी
Read More45. हसन और मुबारक मुबारक, अलाउद्दीन का चौथा पुत्र था। अपने से बडे़ तीनों भाइयों की दुर्दशा देखकर उसे बड़ा खौफ
Read More44. अल्प खाँ का हिसाब शाही हरम, शाही दरबार इस समय कुचक्रों का अड्डा बन चुका है। मलिक काफूर के स्वार्थ
Read Moreयमुना के किनारे यमुना के जल की ही एक विशाल झील थी। कोई भी पशु-पक्षी भूले से भी अगर उसका
Read Moreश्रीकृष्ण जैसे-जैसे बड़े हो रहे थे, उनके सम्मोहन में गोप-गोपियां, ग्वाल-बाल, पशु-पक्षी, नदी-नाले, पहाड़ी-पर्वत, पेड़-पौधे, वन-उपवन – सभी एक साथ
Read More43. भ्रष्ट शहजादे से पहला प्रतिशोध जिस समय मलिक काफूर अलाउद्दीन के निर्बल पुत्रों शादी खाँ और अबू वक्र को अपने
Read Moreगोधन एवं गोपों का अपहरण कर ब्रह्मा जी उन्हें अपने लोक में ले गए। अपनी योग-शक्ति से उन्होंने सबको सुला
Read Moreश्रीकृष्ण-वध के लिए दृढ़ संकल्प अघासुर शीघ्र ही वृन्दावन के उस स्थान पर पहुंच गया जहां श्रीकृष्ण अपने ग्वाल-बालों के
Read More42. सफलताएँ संभवतः समय स्वयं इस महामिलन की प्रतीक्षा में था, अंतरिक्ष इसी घड़ी की बाट जोह रहा था। देवलदेवी और
Read Moreश्रीकृष्ण, भैया दाऊ और अपने मित्रों के साथ नियमित रूप से वन जाने लगे। वे चारागाह जाते, गाय-बछड़ों को स्वतंत्र
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