यशोदानंदन-३५
देवराज इन्द्र का आदेश पाते ही समस्त घातक बादल वृन्दावन के उपर प्रकट हुए। वहां निरन्तर बिजली की चमक, बादलों
Read Moreदेवराज इन्द्र का आदेश पाते ही समस्त घातक बादल वृन्दावन के उपर प्रकट हुए। वहां निरन्तर बिजली की चमक, बादलों
Read Moreवर्षा ऋतु और सम्यक वृष्टि के नियामक देवराज इन्द्र को प्रसन्न करने हेतु व्रज में विशाल यज्ञ करने की प्रथा
Read More51. विजय घोष वह शुभ घड़ी आई चार अप्रैल तेरह सौ बीस को। खुशरव शाह और देवलदेवी ने शाही हरम के
Read Moreपृथ्वी पर हेमन्त ऋतु का आगमन हो चुका था। कास के श्वेत पुष्पों से धरा आच्छादित थी। प्रभात होते ही
Read More50. अंतिम प्रबंध मदुरा, तैलंगाना की विजय के बाद खुशरव शाह वापस देवगिरी पहुँचा। तैलंगाना में उसे वहाँ के सेनापति अनिल
Read Moreराधा का गोरा मुखमंडल लज्जासे आरक्त हो उठा। मन में असमंजस के भाव उठ रहे थे – एक अपरिचित छोरे
Read More49. भावी सम्राट की भूमिका ‘सुल्ताना देवल, आपको हासिल करके हमें बहुत खुशी मिली है।’ मुबारक शाह देवलदेवी के रूखसारों पर
Read More48. देह विडंबना का पूर्ण प्रतिशोध दो घड़ी रात गए द्वार पर कोलाहल सुन देवलदेवी वस्त्र संभालकर शय्या से उठ गई।
Read More47. स्त्रैण सुल्तान देवगिरी में शाही खेमा लगा है। उस खेमे में सुल्तान मुबारक और वजीर खुशरव शाह मौजूद हैं। देवगिरी
Read Moreकालिया नाग ने श्रीकृष्ण के आदेश का त्वरा से पालन किया। श्रीकृष्ण भी मुस्कुराते हुए अपने स्वजनों के पास लौट
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