यशोदानंदन-४२
अक्रूर जी कुछ क्षणों तक मौन रहे। वे स्पष्ट शब्दों में कैसे बताते कि किस निमित्त उन्होंने यात्रा की है?
Read Moreअक्रूर जी कुछ क्षणों तक मौन रहे। वे स्पष्ट शब्दों में कैसे बताते कि किस निमित्त उन्होंने यात्रा की है?
Read Moreअक्रूर जी ने कंस का कथन बड़े ध्यान से सुना। कुछ समय मौन रहकर विचार किया – यदि वह बालक
Read More55. मंगल उत्सव राजमहल की अट्टालिका पर साम्राज्ञी देवलदेवी खड़ी थी। सांझ ढल रही थी। स्वच्छ आकाश में तैरते हुए पक्षी
Read More“हे सच्चिदानन्द स्वरूप श्रीकृष्ण! आपका यह अद्भुत रूप मन और वाणी का विषय नहीं है। आप योगेश्वर हैं। सारे जगत
Read More54. अध्यादेश एवं धर्म स्थापना सिंहासन रोहण के उपरांत साम्राज्ञी देवलदेवी और सम्राट धर्मदेव ने धर्म के अनुसार शासन-व्यवस्था को सुदृढ़
Read Moreअपनी अद्भुत लीला समाप्त कर श्रीकृष्ण ने व्रज लौटने का निश्चय किया। व्रज में श्रीकृष्ण की अनुपस्थिति से प्रोत्साहित अरिष्टासुर
Read Moreपहली बार श्रीकृष्ण निरुत्तर हुए थे। जिसके पास ब्रह्माण्ड के सभी प्रश्नों के उत्तर थे, वह राधा के सामने चुप
Read More53. सम्राट और साम्राज्ञी अंततः देवलदेवी और धर्मदेव के अतुलनीय बलिदानों एवं शौर्यकार्यों से विधाता देव रीझ उठे और पंद्रह अप्रैल,
Read Moreवह शरद-पूर्णिमा की रात थी। बेला, चमेली, गुलाब, रातरानी की सुगंध से समस्त वातावरण मह-मह कर रहा था। चन्द्रदेव ने
Read Moreआश्चर्य! घोर आश्चर्य!! सात वर्ष का बालक गोवर्धन जैसे महापर्वत को अपनी ऊंगली पर सात दिनों तक धारण किए रहा।
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