यशोदानंदन-२५
गोकुल में हो रहे नित्य के उत्पातों ने नन्द बाबा और अन्य वरिष्ठों को चिन्ता में डाल दिया था। इस
Read Moreगोकुल में हो रहे नित्य के उत्पातों ने नन्द बाबा और अन्य वरिष्ठों को चिन्ता में डाल दिया था। इस
Read Moreदेवलदेवी कहती रही और धर्मदेव सुनते रहे, ठीक उसी तरह जैसे धर्मभक्त श्रीमद्भागवत पुराण का प्रवचन सुनता है। राजकुमारी देवलदेवी की
Read Moreचोर कहलाना कोई पसंद नहीं करता, लेकिन कान्हा अपने लिए ‘माखनचोर’ का संबोधन सुनकर भी मुस्कुराते रहते थे। मातु यशोदा
Read Moreश्रीकृष्ण जैसे-जैसे बड़े हो रहे थे, यमुना के प्रति आकर्षण वैसे-वैसे ही बढ़ रहा था। यमुना का किनारा ही उनके
Read More41. महामिलन ‘वह’ उस समय नायबे सल्तनत मलिक काफूर का सहायक था, दक्खन की जंगों में उसने अपनी वीरता से नायबे
Read Moreयमलार्जुन के पेड़ कोई पौधे नहीं थे, विशाल वृक्ष थे। उनके गिरने से बिजली चमकने के समय उत्पन्न ध्वनि की
Read Moreमातु यशोदा! अपनी स्मृतियों पर तनिक जोर डालें। श्रीकृष्ण के शिशु-काल की शरारतों को याद कीजिए। क्या कोई सामान्य बालक
Read More40. निष्फलताएँ कई घटनायें दिल्ली सल्तनत और उनसे संघर्ष कर रही रियासतों में घटीं। इन घटनाओं के उपरांत देवलदेवी और
Read Moreछः महीनों में ही श्रीकृष्ण घुटनों के बल मकोइया बन पूरे आंगन में विचरण करने लगे। चलते समय वे किलकारी
Read Moreश्रीकृष्ण ने अवतरण के प्रथम दिवस से ही अपनी अद्भुत बाललीला आरंभ कर दी थी। वे उन्हीं को अधिक
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