उपन्यास : देवल देवी (कड़ी 43)
39. षडयंत्र की पहली चिंगारी कामक्रीड़ा से तृप्त बेसुध शहजादे को देवलदेवी ने झिंझोड़कर जगा दिया। शहजादा नींद में पागलों की
Read More39. षडयंत्र की पहली चिंगारी कामक्रीड़ा से तृप्त बेसुध शहजादे को देवलदेवी ने झिंझोड़कर जगा दिया। शहजादा नींद में पागलों की
Read More“देख रहे हैं आर्य! आज मेरा लल्ला तीन मास और एक पक्ष का हो गया है। अत्यन्त स्वाभाविक रूप से
Read Moreकैसी विडंबना थी – गोकुल में जहां आनन्दोत्सवों की शृंखला थमने का नाम नहीं ले रही थीं, वही मथुरा में
Read More38. स्वधर्म स्थापना हेतु शील बलिदान आहट सुनकर देवलदेवी शय्या से उठकर खड़ी हो गई। कक्ष में शहजादा खिज्र खाँ आ
Read Moreपूतना-वध हो चुका था लेकिन कैसे और क्यों हुआ था, सामान्य मनुष्यों की समझ के बाहर था। यह रहस्य
Read More37. बलात् समर्पण की रात्रि देवलदेवी फूल, कलियों, रत्न और जवाहरात से सजी शय्या पर बैठी है। उसकी देह इत्र की
Read Moreनन्द बाबा और मातु यशोदा के नेत्रों से आनन्दाश्रु छलक रहे थे। समस्त गोकुलवासी भी आनन्द-सरिता में गोते लगा रहे
Read More36. रामदेव, शाही हरम में सुल्तान अलाउद्दीन की पुत्री और अपने पुत्र के निकाह के जलसे में दो घोषणाएँ करता है।
Read Moreपुत्र-प्राप्ति के लिए कंस ने नन्द बाबा को बधाई दी, परन्तु जब यह ज्ञात हुआ कि पुत्र का जन्म उसी
Read More35. सुल्तान और नायब ”काफूर, दिल्ली सल्तनत के जांबाज सिपहसालार दक्खन पर तुम्हारी विजय ने हमारा सिर फर्ख से बुलंद कर
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