उपन्यास : देवल देवी (कड़ी 39)
35. सुल्तान और नायब ”काफूर, दिल्ली सल्तनत के जांबाज सिपहसालार दक्खन पर तुम्हारी विजय ने हमारा सिर फर्ख से बुलंद कर
Read More35. सुल्तान और नायब ”काफूर, दिल्ली सल्तनत के जांबाज सिपहसालार दक्खन पर तुम्हारी विजय ने हमारा सिर फर्ख से बुलंद कर
Read Moreकंस एक क्रूर अधिनायक था। पर साथ ही चतुर और धूर्त राजनीतिज्ञ भी था। मथुरा का वह राजा बन ही
Read Moreयोगमाया का प्रभाव समाप्त होते ही मातु यशोदा की निद्रा जाती रही। जैसे ही उनकी दृष्टि बगल में लेटे और
Read More34. सखी से मंत्रणा दिल्ली के शाही हरम में गुजरात की जबरन अपहृत की गई राजकुमारी देवलदेवी का कक्ष। अब वहाँ
Read Moreकंस तो कंस था। वह पाषाण की तरह देवी देवकी की याचना सुनता रहा, पर तनिक भी प्रभावित नहीं हुआ।
Read Moreमेघ, दामिनी और चन्द्रमा – तीनों ने जगत्पिता के एक साथ दर्शन किए। अतृप्ति बढ़ती गई। तीनों पूर्ण वेग से
Read More33. वीर पुत्र का दुर्बल पिता 1306 में देवलदेवी को हिरासत में लेने के बाद गुजरात के सुबेदार अल्प खाँ और
Read Moreशिशु कृष्ण मंद-मंद मुस्कुरा रहे थे। वे जी भरके अपने माता-पिता को देख लेना चाह रहे थे — पता नहीं
Read Moreकंस वापस अपने राजप्रासाद में आ तो गया परन्तु भगवान के प्रति शत्रुता के सागर में निमग्न वह बैठे-सोते, चलते-फिरते,
Read More32. अपभ्रष्ट शहजादा सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी का सबसे बड़ा पुत्र खिज्र खाँ जो रात दिन सिर्फ अफीम और मद्यपान करके यौनसुख
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