उपन्यास : देवल देवी (कड़ी 35)
31. कटु संवाद दिल्ली सल्तनत का शाही हरम का एक कक्ष, बिना साज-श्रृंगार के। कक्ष में न तो शय्या है और
Read More31. कटु संवाद दिल्ली सल्तनत का शाही हरम का एक कक्ष, बिना साज-श्रृंगार के। कक्ष में न तो शय्या है और
Read More30. मधुपर्व गुर्जर राजकन्या देवलदेवी के दुर्भाग्य के आरंभ से ठीक पूर्व जब वह यादव युवराज शंकरदेव के प्रेमपाश में बंधी
Read Moreघोड़े पर सवार जिरह बख्तर पहने अल्प खाँ राजकुमार को देखकर चिल्लाकर कहता है ”अरे ओ काफिर, तू तो अभी बच्चा
Read More29. दुर्भाग्य का आरंभ निश्चित समय और बेला पर पिता और गुरुजनों से आशीर्वाद लेकर अपनी सखियों से गले मिलकर राजकुमारी
Read Moreकंस बाल्यकाल से ही आततायी और आसुरी प्रवृत्ति का था। राजा उग्रसेन के अथक प्रयास के पश्चात भी उसके स्वभाव
Read More“महर्षि! श्रीकृष्ण का मथुरा में प्रवेश से लेकर कंस-वध का संपूर्ण वृतांत का आप अपने श्रीमुख से मुझे सुनाकर अनुगृहीत
Read More28. अपवित्र उद्देश्य राजकुमारी देवलदेवी को अपने हरम में लाने के लिए कामुक सुल्तान ने नायब मलिक काफूर और अजिरे मुमालिक
Read Moreगर्गाचार्य के पास कोई विकल्प शेष नहीं रहा। उन्होंने समस्त उपस्थित जन समुदाय को
Read Moreमहर्षि की बातें यशोदा जी बड़े ध्यान से सुन रही थीं। जैसे ही ऋषिवर ने अपना कथन समाप्त किया उनके
Read More27. स्नेह बंधन बगलाना के महल में राजकुमारी देवलदेवी का कक्ष, गुजरात के राजकुमार भीमदेव एक सज्जित आसन पर बैठे हैं
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