उपन्यास : देवल देवी (कड़ी 30)
27. स्नेह बंधन बगलाना के महल में राजकुमारी देवलदेवी का कक्ष, गुजरात के राजकुमार भीमदेव एक सज्जित आसन पर बैठे हैं
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Read Moreसेवकों ने दोनों पर्यंकों को पास ला दिया। यशोदा जी की दृष्टि जैसे ही पति
Read More“क्या कहा आपने? कृष्ण मेरा पुत्र नहीं है? यह कैसे हो सकता है? मुझे स्मरण नहीं कि आपने कभी मिथ्यावाचन
Read More26. बगलाना मेें उत्सुकता बगलाना के छोटे से महल का एक कक्ष, आमने-सामने आसन पर राजा कर्ण और राजकुमारी देवलदेवी बैठे
Read More25. देवगिरी मेें चिंता देवगिरी के महाराज रामदेव व्यग्र भाव से टहल रहे हैं, दोनों हाथ को बाँधकर पीठ पीछे कमर
Read More24. नियुक्त 1299 में मंगोलो ने डुतुलुग ख्वाजा की अधीनता में दो लाख की सेना के साथ दिल्ली सल्तनत पर हमला
Read More23. धिक्कृत अभिलाषा मलिका-ए-हिंद (कमलावती) ने खुद को पूर्णरूप से सुल्तान के कदमों में निसार कर दिया। अलाउद्दीन ने उसे
Read Moreशाम तीन बजे मुझे पर्सनल विभाग में बुलाया गया था, वहाँ कई औपचारिकताएँ पूरी हो गयीं, लेकिन एक बात पर
Read More22. गंधर्व परिणय कामज्वर के बाद जब देवलदेवी की चेतना लौटी तब वह लाज से सिकुड़-सिकुड़ गई। अपने प्रिये के छूने
Read Moreअध्याय-12 : बदलते रास्ते जो था मेरा हाले दिल वो बयां हुआ जुबां से। जो कहेंगे अश्के-रंगी वो अलग है
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