आत्मकथा : मुर्गे की तीसरी टांग (कड़ी 2)
अध्याय-1: मैं और मेरा परिवार वो ये कहते हैं कि ‘गालिब कौन है?’ कोई बतलाओ कि हम बतलायें क्या? विश्वनाथ
Read Moreअध्याय-1: मैं और मेरा परिवार वो ये कहते हैं कि ‘गालिब कौन है?’ कोई बतलाओ कि हम बतलायें क्या? विश्वनाथ
Read Moreप्राक्कथन बंदउँ गुरुपद कंज कृपासिन्धु नररूप हरि । महा मोह तम पुंज जासु वचन रविकर निकर ।। गुरु गोविन्द दोनों
Read Moreजब कृष्ण का रथ उपप्लव्य नगर पहुंचा, तो युधिष्ठिर ने उनका स्वागत किया. वे उत्सुकता से कृष्ण के मुख की
Read Moreकुछ क्षण रुकने के बाद कर्ण ने आगे कहा- ‘भगवन्, अगर मैं पांडवों की ओर आ भी जाऊँ, तो इससे
Read Moreकृष्ण को कर्ण की मानसिक अवस्था देखकर दुःख हुआ। उन्होंने यह कल्पना तो की थी कि अपने जन्म का रहस्य
Read More‘भगवन्, क्या आप जानते हैं कि मेरी माता कौन हैं?’ कर्ण ने कृष्ण की आंखों में देखकर यह सीधा प्रश्न
Read Moreप्रातः नित्य क्रियाओं से निवृत्त होकर कृष्ण ने कुंती और विदुर पत्नी से विदा ली तथा अपने साथी सात्यकि के
Read Moreकुंती की बात सुनकर कृष्ण सोच में पड़ गये। उस संभावित युद्ध में कर्ण और अर्जुन का संग्राम होना एक
Read Moreकृष्ण प्रश्नवाचक नेत्रों से सीधे कुंती की ओर देख रहे थे और अपने प्रश्न के उत्तर की प्रतीक्षा कर रहे
Read Moreएकांत होते ही कुंती के मन में वे प्रश्न उभर आये जिनको वे कृष्ण से पूछना चाहती थीं- ‘गोविन्द, युद्ध
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