उपन्यास : शान्तिदूत (चवालीसवीं कड़ी)
जब विदुर दुर्योधन को राजसभा में वापस लेकर आये, तब भी वह क्रोध से कांप रहा था। विदुर ने धृतराष्ट्र
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Read Moreदुर्योधन के अशिष्टतापूर्वक राजसभा कक्ष से बाहर चले जाने पर किसी को आश्चर्य नहीं हुआ। यह उसकी जिन्दगी में पहला
Read Moreएक-एक थाल में दोनों ओर से लोग तिलक करने का सामान ले कर तैयार थे। अपने विशिष्ट अतिथि ठाकुर साहब और
Read Moreदुर्योधन का दो टूक उत्तर सुनकर कृष्ण बहुत निराश हुए। उनका धैर्य भी समाप्त हो गया। दुर्योधन को समझाने के
Read Moreदिव्यशक्तियों सी अनुभूति कराने वाला, धूल धूसरित रहने वाला रमुवा, सफेद ऐप्रन पहनकर आला गले में शिवशक्तियुक्त, गांव और पूरे पंचायत का
Read Moreराजसभा में सर्वत्र मौन छाया था। भीष्म और द्रोण तक का तिरस्कार करने वाले युवराज दुर्योधन के सामने फिर किसी
Read Moreअब कृष्ण ने महाराज धृतराष्ट्र की ओर मुख किया। वे अपनी अंधी आंखों की पुतलियों को ऊपर चढ़ाये हुए राजसभा
Read Moreरात के दस बजे थे, रामकुमार अपनी परीक्षा की तैयारी में व्यस्त था, तभी जोर की आवाज हुई और बिजली
Read Moreराजसभा में पांचाली के वस्त्रहरण का कृष्ण द्वारा उल्लेख करने पर युवराज दुर्योधन आगबबूला हो गया, जैसे किसी ने उसको
Read Moreखाना खाकर मानसी ने अपने बच्चों के साथ ही सोने को कहा, तो रामकुमार को बड़ा ही अटपटा सा लगा। उसने
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