आत्मकथा : मुर्गे की तीसरी टांग (कड़ी 11)
हमारे आगरा आने के कुछ दिनों बाद ही बड़े चाचाजी ने बँटवारा करा लिया। आगरा आने के कारण हमारा खर्च
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Read Moreअध्याय-4: पलायन क्या पूछता है तू मेरी बरबादियों का हाल? थोड़ी सी ख़ाक लेके हवा में उड़ा के देख कक्षा
Read Moreगाँधी शताब्दी समारोह समाप्त हो जाने के बाद मैं अपनी पढ़ाई में लग गया था, हालांकि रात्रि में देर तक
Read Moreबाबा के ही गाँव कारब के निवासी एक अन्य अध्यापक थे श्री बाबू लाल शास्त्री। शास्त्री जी हिन्दी और संस्कृत
Read Moreअध्याय-3: अक्ल का पुतला यादे माज़ी अज़ाब है या रब ! छीन ले मुझसे हाफिजा मेरा ।। जब मैं कक्षा
Read Moreकक्षा तीन उत्तीर्ण करने के बाद मैं कक्षा चार में आया जहाँ मेरे अध्यापक हुए पचावर गाँव के निवासी श्री
Read Moreजब मैं कक्षा तीन में आया, तो मेरे बड़े भाई श्री गोविन्द स्वरूप कक्षा 5 में पहुँच चुके थे। उनकी
Read Moreअध्याय-2: श्री गणेशाय नमः कहानी मेरी रूदादे जहाँ मालूम होती है। जो सुनता है उसी का दास्तां मालूम होती है।।
Read Moreमेरे पिताजी श्री छेदा लाल अग्रवाल हैं, जो परिवार में ‘छिद्दा’ नाम से जाने जाते हैं। उन्होंने कभी कहीं पर
Read Moreअध्याय-1: मैं और मेरा परिवार वो ये कहते हैं कि ‘गालिब कौन है?’ कोई बतलाओ कि हम बतलायें क्या? विश्वनाथ
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