चिन्तन
जब जाग रहा होता हूँ, तब भी सोया सा रहता हूँ, आँख खुली पर ब्रह्मांड में कहीं खोया सा रहता
Read Moreअर्थ के भी महत्व, समझ आने लगे हैं, न दिया तो रूठकर, अपने जाने लगे हैं। दे दिया गर सारा,
Read Moreदोहे “जीवन के हैं मर्म” —मात-पिता को तुम कभी, मत देना सन्ताप।नित्य नियम से कीजिए, इनका वन्दन-जाप।।—आदिकाल से चल रही,
Read Moreसच को सच कहने से डरता हूँ, रिश्ता कोई टूट न जाए, सच का किस्सा सच सुनकर, अपना कोई रूठ
Read Moreचूरन त्रिफला लीजिए,ऋतुओं के अनुसार। उदर रोग नासें सभी,शेष न रहे विकार।। अपना जितना भार हो,कर उसके दस भाग। मात्रा
Read Moreइस चुनाव के दौर में, हवा चली विपरीत। वोटर नब्ज देख रहा, किस की कैसी नीत। खूब नचाया नाच है,
Read Moreमानवता का धर्म निभाना।ख़ुद को चोखा रोज़ बनाना।। बुरे सोच को दूर भगाना।प्रेमभाव को तुम अपनाना।।(1) दयाभाव के फूल खिलाना।पर-उपकारी
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